इटावा की सदर तहसील में गुरुवार दोपहर वह दृश्य किसी दिल दहला देने वाले सच जैसा था। खुड़ीसर गाँव का गरीब किसान शमसुद्दीन पुत्र शरीफ़, अपनी दो बीघा ज़मीन की पैमाइश कराने के लिए दो वर्षों से न्याय की उम्मीद में दफ्तरों के चक्कर काटते-काटते आज टूट गया।

किसान का कहना है कि बार-बार गुहार लगाने के बावजूद तहसील कर्मचारियों ने उसकी मदद नहीं की, बल्कि उस पर ₹50,000 रिश्वत देने का दबाव बनाया। 20 हजार देनेकर बाद 30हजार रिश्वत का बोझ उठाने में असमर्थ किसान की आँखों में सिर्फ़ बेबसी थी,और इसी बेबसी ने आज उसने रिश्वत का ऑडियो सुनाया तो लेखपाल और कानूनगो ने कमरे में बंद कर पीट दिया।इस घटना के बाद किसान को मजबूर कर दिया कि वह SDM सदर विक्रम सिंह राघव की गाड़ी के सामने धरने पर बैठ गया।

शमसुद्दीन ने बताया कि उसने लेखपाल नागेंद्र सिंह को पैमाइश के लिए प्रार्थना पत्र दिया था, उससे 50000 रिश्वत की मांग की। 20हजार लेलिए शेष 30 हजार के लिए दवाव बना रहे थे। रिश्वत का ऑडियो पर जहाँ एक बंद कमरे में लेखपाल नागेंद्र सिंह, वेदराम और सुरेश ने उसे घेर लिया। किसान का आरोप है कि दरवाज़ा बंद कर मुझे गालियाँ थप्पङो से पीटा गया… मैं किसी तरह जान बचाकर बाहर निकला।
मारपीट और अपमान से टूटा किसान बाहर आया और रोते हुए सीधे SDM की गाड़ी के सामने जा बैठा। उसकी आँखों में आंसू थे, हाथ काँप रहे थे, और शब्दों में सिर्फ़ एक पुकार साहब, मेरी जमीन नाप दो, मुझे इंसाफ दिला दो।तहसील परिसर में कुछ देर अफरा-तफरी जैसा माहौल रहा। किसान की हालत देखकर लोग इकट्ठा हो गए और जिलाधिकारी मौके पर पहुँचे।

उपजिलाधिकारी विक्रम सिंह राघव ने बताया कि पीड़ित किसान की शिकायत पर उसे उच्च स्तरीय जांच सदर तहसीलदार राजकुमार को सौंपी गई है जांच रिपोर्ट के बाद दोषी पाए जाने पर लेखपाल और कानूनगो पर विभागीय कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
