इटावा के चकरनगर तहसील के रानीपुरा गांव में 500 से अधिक दलित-गरीब परिवारों की 95 एकड़ उपजाऊ भूमि को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। सेंचुअरी विभाग एक युवक की शिकायत के आधार पर इस ज़मीन को अपनी बताते हुए कब्ज़ा खाली कराने की कार्रवाई कर रहा है।
ग्रामीणों का आरोप है कि यह ज़मीन उनके पूर्वजों ने 1912 से बंजर भूमि को उपजाऊ बनाकर खेती योग्य बनाई थी और पीढ़ियों से वे इसी पर आश्रित हैं।रियासत काल में राजा निरंजन सिंह जूदेव ने गरीब परिवारों को यह ज़मीन खेती के लिए पट्टे पर दी थी।1970 में सेंचुअरी विभाग ने भूमि खाली कराने की कोशिश की, तब ग्रामीण तत्कालीन पीएम इंदिरा गांधी से मिले थे।

डीएम मोहनचंद जोशी की मौजूदगी में समझौता हुआ।1973 में ग्राम प्रधानों ने विभाग को 105 एकड़ भूमि सौंपने का प्रस्ताव पारित किया था, जिसके बदले ग्रामीणों को मौजूदा ज़मीन मिली।मिटहटी गांव निवासी राजकुमार ने जुलाई में शिकायत की थी कि ग्रामीण सेंचुअरी की ज़मीन पर अवैध कब्ज़ा किए हैं। इसके बाद विभागीय टीम ने पैमाइश शुरू कर कब्ज़ा हटाने की कार्रवाई छेड़ दी।ग्रामीणों ने सोमवार सुबह 9 बजे जोरदार प्रदर्शन कर चेतावनी दी कि ज़मीन छीनी गई तो वे आत्महत्या तक कर लेंगे।

ग्रामीण अमर सिंह, रामप्रकाश, राजाराम, संतोष कुमार, महेंद्र सिंह, लखपत सिंह, राहुल कुमार, सोमवती समेत सैकड़ों महिला-पुरुष।एसडीएम ब्रह्मानंद कठेरिया ने बताया ग्रामीणों से दस्तावेज़ मांगे गए हैं उनके पास कुछ पुराने कागजात हैं, लेकिन पट्टा या खतौनी में नाम नहीं मिला।फिलहाल पैमाइश रोक दी गई है, दस्तावेज़ जांच के बाद आगे की कार्रवाई होगी।ग्रामीणों ने डीएम शुभ्रांत कुमार शुक्ला से हस्तक्षेप की मांग की है और कहा –यह भूमि हमारे पूर्वजों की मेहनत का परिणाम है, इसे छीनना हमारी रोज़ी-रोटी पर सीधा प्रहार होगा।
