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काव्यांजलि में भावों की अविरल गंगा,कवियों ने आनंद स्वरूप मिश्र को शब्दों से दी अमर श्रद्धांजलि

इटावा के जनता कॉलेज बकेवर का प्रांगण उस रात भावों की गंगा में डूब गया, जब संस्थापक सेक्रेटरी श्री आनंद स्वरूप मिश्र जन्म शताब्दी समारोह के द्वितीय दिवस पर आयोजित अखिल भारतीय कवि सम्मेलन काव्यांजलि में देशभर से आए काव्य हस्ताक्षरों ने अपनी वाणी के पुष्पों से श्रद्धांजलि अर्पित की।अर्धरात्रि तक गूंजते रहे भावों के स्वर, और हर पंक्ति पर तालियों की गड़गड़ाहट ने आसमान को जैसे झुका दिया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ अधिवक्ता, उच्च न्यायालय इलाहाबाद दिलीप कुमार गुप्त ने की। मंचासीन अतिथियों में प्राचार्य प्रो. राजेश किशोर त्रिपाठी तथा समारोह संयोजक डॉ. दिव्य ज्योति मिश्र उपस्थित रहे।

मां सरस्वती एवं संस्थापक आनंद स्वरूप मिश्र के चित्र पर पुष्पांजलि से आरंभ हुए कार्यक्रम में अतिथियों का स्वागत माल्यार्पण, बैज अलंकरण और प्रतीक चिन्ह भेंट कर किया गया।अपने उद्बोधन में श्री गुप्त ने कहा यह शिक्षण संस्थान निःस्वार्थ शैक्षिक मूल्यों की पावन भूमि है। आनंद स्वरूप मिश्र का कर्मयोग आज भी इस परिसर की हर ईंट में जीवित है।

कवियत्री मंजू यादव की हंस वाहिनी शारदे माता.से वातावरण भक्तिरस में डूब गया।कवि अरविंद यादव ने स्मरण के स्वर में कहा जब-जब याद तुम्हारी आई, तब-तब हमने गीत लिखे.ओज कवि सुनील अवस्थी की पंक्तियां चलूँ मैं सत्य के पथ पर, मुझे मां ने सिखाया है. पर सभागार तालियों से गूंज उठा।
औरैया से पधारे ओज कवि अजय शुक्ल अंजाम की जोशीली रचना राणा चेतक के साथ-साथ, भारत माता की जय बोलो. ने देशभक्ति की लहर दौड़ा दी।

अशोक यादव भरथना ने भावुक स्वर में कहा अपने घर के आंगन की महकती प्यार की खुशबू. इसे मत भूल जाना.हास्य कवि लटूरी लट्ठ की व्यंग्य रचनाओं ने देर रात तक हंसी की लहरें बिखेरीं किससे कहें सुनाए किसको, कैसे वक्त गुजार रहे हैं.उत्कृष्ट संचालन कर रहे ओज कवि रोहित चौधरी ने जब कहा मैं भूषण की सिंह गर्जना, खुद की ताकत रखता हूं.तो पूरा सभागार देशभक्ति की भावना से गूंज उठा।

श्रृंगार रस के राष्ट्रपति पुरस्कृत कवि डॉ. राजीव राज ने जब भावनाओं के स्वर छेड़े माँ कहते ही मिट गई अंतरमन की पीर.तो कई आंखें नम हो उठीं।राष्ट्रीय ख्यातिलब्ध कवि डॉ. कमलेश शर्मा की पंक्तियाँ राम हुए हैं कितने और प्रमाण दें. सभागार में प्रतिध्वनित हुईं।वहीं वरिष्ठ कवि डॉ. कुश चतुर्वेदी ने जीवन के आदर्शों पर आधारित रचना तुम इसको भले सही मानो. सुनाकर नव पीढ़ी को सत्य और निष्ठा का संदेश दिया।

कार्यक्रम का सुंदर संचालन डॉ. कुश चतुर्वेदी व रोहित चौधरी ने किया।अंत में प्राचार्य प्रो. राजेश किशोर त्रिपाठी ने सभी कवियों, श्रोताओं एवं प्रबंध समिति का हृदय से आभार व्यक्त किया।रात के अंतिम पलों तक तालियों की गूंज में जब वंदे मातरम् के स्वर उठे, तो लगा मानो स्वयं आनंद स्वरूप मिश्र की आत्मा इस काव्यांजलि से पुलकित होकर आशीष बरसा रही हो

By G-News18

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