रिपोर्ट -सुशील कान्त
जसवंतनगर। लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर एक बार फिर दबाव और डर का साया मंडरा गया, जब तहसील रिपोर्टर मनोज कुमार को एक खबर प्रकाशित करने के बाद जान से मारने की धमकी दी गई।पत्रकार की शिकायत पर पुलिस ने तत्काल सक्रियता दिखाते हुए आरोपी को थाने बुलाकर पूछताछ की और मामले को शांत कराया।
जानकारी के अनुसार, मनोज कुमार अपनी बेबाक रिपोर्टिंग और निष्पक्ष पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं। हाल ही में उन्होंने जसवंतनगर के एक क्लीनिक में इलाज के दौरान गांव कैस्त निवासी नंदिनी पांडेय की मौत से जुड़ी खबर अपने चैनल और पोर्टल पर प्रसारित की थी।
यह खबर सामने आने के बाद कथित डॉक्टर का परिवार बौखला गया।
आरोप है कि 26 अक्टूबर 2025 को दोपहर लगभग 2 बजे, कथित डॉक्टर के पिता अपने कुछ साथियों के साथ कस्बे की एक दोना-पत्तल भंडार की दुकान पर पहुंचे और वहां मौजूद मास्टर रामनारायण को धमकाते हुए बोले अपने बेटे मनोज को समझा लो, हमारे क्लीनिक की खबरें चलाना बंद करे, नहीं तो उसके खिलाफ एसी एक्ट का मुकदमा दर्ज करा दूँगा!
रामनारायण ने यह बात तुरंत मनोज कुमार को फोन पर बताई।कुछ ही देर में मनोज मौके पर पहुंचे तो आरोपी वहां से फरार हो गया। उन्होंने तत्काल डायल 112 पर सूचना दी और थाने पहुंचकर लिखित शिकायत दर्ज कराई।
थानाध्यक्ष कमल भाटी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए आरोपी को थाने बुलाया और कड़ी पूछताछ की।थानाध्यक्ष ने सख्त लहजे में कहा फोटो-वीडियो बनाना और खबरें चलाना पत्रकारों का काम है, इसमें किसी की रोक-टोक बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मीडिया देश का चौथा स्तंभ है, और इसे डराना-धमकाना कानूनन अपराध है।
पुलिस की मौजूदगी में आरोपी ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए पत्रकार मनोज कुमार से माफी मांगी। दोनों पक्षों ने आपसी सहमति से मामला समाप्त किया।हालाँकि घटना के बाद से स्थानीय पत्रकारों में गहरा रोष देखा जा रहा है। उनका कहना है कि सच दिखाने और लिखने पर धमकाना लोकतंत्र की आत्मा पर प्रहार है। पत्रकारिता अपराध नहीं, समाज की आँखें खोलने का कार्य है।पत्रकार संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि भविष्य में किसी पत्रकार को धमकी दी गई, तो सामूहिक रूप से आंदोलन किया जाएगा।
