इटावा/बकेवर। करवाचौथ का त्योहार अपने आप में त्याग, प्रेम और आस्था का प्रतीक है। जहाँ एक ओर महिलाएँ अपने पति की लंबी आयु के लिए व्रत रखती हैं, वहीं बकेवर स्थित आस्था वंडर लाइब्रेरी ने इस पर्व को एक नई सोच के साथ जोड़ा है।
लाइब्रेरी के बच्चों और संस्थापक प्रवीन कुमार ने इस अवसर पर एक सुंदर पहल की — “एक व्रत पर्यावरण के नाम”। प्रवीन कुमार ने कहा, “जब एक पेड़ माँ के नाम पर लग सकता है, तो पिता या पति के नाम पर क्यों नहीं? अगर हम अपने प्रियजनों की लंबी उम्र की कामना करते हैं, तो उनके लिए स्वच्छ हवा और स्वस्थ पर्यावरण बनाना भी हमारा कर्तव्य है।”
उन्होंने कहा कि बढ़ते प्रदूषण और बीमारियों की बड़ी वजह यह है कि अब घरों के आँगन से पेड़-पौधे गायब होते जा रहे हैं। पहले हर घर में तुलसी, नीम या अमरूद का पौधा होता था जिससे वातावरण शुद्ध रहता था, लेकिन आज आँगन के साथ वह परंपरा भी खोती जा रही है।
लाइब्रेरी के बच्चों ने भी संदेश दिया कि जैसे वे अपने करियर और भविष्य की तैयारी करते हैं, वैसे ही धरती माँ के भविष्य की चिंता करना भी आवश्यक है।
संस्थापक प्रवीन कुमार ने कहा, “लाइब्रेरी से केवल शिक्षा ही नहीं, बल्कि संवेदना और सामाजिक जिम्मेदारी भी सीखनी चाहिए। अगर हर व्यक्ति अपने नाम या अपने माता-पिता, जीवनसाथी के नाम पर एक पौधा लगाए, तो धरती फिर से हरियाली से भर सकती है।”
कार्यक्रम के दौरान नगर पंचायत अध्यक्ष सन्नी यादव और लाइब्रेरी के बच्चों ने पौधे लगाए और यह संकल्प लिया कि वे हर साल करवाचौथ पर एक नया पौधा जरूर लगाएंगे।
यह पहल न केवल पर्यावरण संरक्षण का संदेश देती है, बल्कि समाज को यह सोचने पर भी मजबूर करती है कि — अगर हम अपने प्रियजनों से सच्चा प्रेम करते हैं, तो उस हवा से भी प्रेम करें जो उन्हें जीवन देती है।

