रिपोर्ट -सुशील कान्त

जसवंतनगर। ऐतिहासिक मैदानी रामलीला के अंतर्गत गुरुवार को दोपहर से ही नगर की सड़कों पर रावण सेना और रामदल के बीच परंपरागत युद्ध का अद्भुत मंचन हुआ। रावण का वीर पुत्र मेघनाद और भाई अतिकाय अपनी विशाल सेना के साथ नगर मार्गों पर उत्पात मचाते हुए नरसिंह मंदिर स्थित राम-लक्ष्मण के विश्राम स्थल पर हमला बोल दिया।वानर दल ने राम-लक्ष्मण की अगुवाई में मोर्चा संभाला और करीब पाँच घंटे तक धनुष-बाण, भाला-बरछी, तलवार आदि प्राचीन अस्त्र-शस्त्रों से रोमांचकारी युद्ध का प्रदर्शन हुआ।

युद्ध करते-करते दोनों दल रामलीला मैदान पहुंचे, जहाँ निर्णायक प्रसंगों का मंचन हुआ।राम की आज्ञा से लक्ष्मण ने अतिकाय से युद्ध किया। अतिकाय ने मायावी शक्तियों से अपना शरीर विराट बना लिया तो हनुमान ने लक्ष्मण को अपने कंधे पर बैठाकर अतिकाय के समकक्ष किया। लक्ष्मण के तीक्ष्ण बाण से अतिकाय का वध हुआ। इसके उपरांत लक्ष्मण और मेघनाद के बीच भीषण संग्राम हुआ। अंततः शेषनाग अवतारी लक्ष्मण ने ब्रह्मास्त्र का प्रयोग कर मेघनाद का वध कर दिया।मेघनाद की मृत्यु से रावण क्रोधित हो राम को ललकारने लगा। उधर, पति का वध होने की सूचना पाकर सुलोचना विलाप करती हुई रणभूमि पहुँची और पति का शीश गोद में रख अग्नि में सती हो गई।

इस मार्मिक दृश्य को देखकर उपस्थित जनसमूह की आंखें नम हो गईं और पूरा वातावरण “जय श्रीराम” के उद्घोष से गूंज उठा।देर रात तक चले कार्यक्रम में हजारों की संख्या में लीलाप्रेमी उपस्थित रहे। स्थानीय कलाकारों ने पात्रों का अद्भुत अभिनय कर दर्शकों को भावविभोर कर दिया।रामलीला को सफल बनाने में कमेटी के प्रबंधक राजीव गुप्ता बबलू, उपप्रबंधक ठा. अजेंद्र गौर, राजीव माथुर एडवोकेट, राजेंद्र गुप्ता, डॉ. पुष्पेंद्र पुरवार, रतन पांडे, प्रभाकर दुबे, प्रशांत यादव, शुभ गुप्ता, अलौकिक गौर, निखिल गुप्ता, तरुण मिश्रा आदि का विशेष योगदान रहा।

